Monday, 9 March 2020

एकाग्रता के बिना साधना नहीं (ekaagrata ke bina saadhana nahin)

लेखक: के.एस.कण्णन्
(BSc, MA (Sanskrit), MPhil, PhD)
हिन्दी अनुवाद : अर्चना वागीश
(के जवाब मे :  lekhana@ayvm.in)


धनुर विद्या का शिक्षण के दौरान पेड़ पर विराजमान एक चील को दिखाकर, द्रोणाचार्यजी ने यह कहा "मेरे इशारे पर चील की गर्दन काट दो" | पहले युधिष्ठिर की बारी थी | "युधिष्ठिर, लक्ष्य लागाओ, मेरी बात पूरी होते ही बाण चलाओ" यह थी द्रोणाचार्यजी की आदेश | युधिष्ठिर ने धनुष और बाण को सज्जित किया | उस समय द्रोणाचार्यजी पूछे – "क्या तुम्हे पेड़ की नोक पर स्थित चील दिखाई दे रहा हैं ?" युधिष्ठिर ने उत्तर दिया "हां मुझे चील दिखाई दे रहा हैं | तुरंत द्रोणाचार्यजी पूछे "क्या तुम्हे इस वृक्ष और मैं दोनों ही दिखाई दे रहे हैं?" | जिसके जवाब में युधिष्ठिर ने कहा "हाँ मुझे वृक्ष,आप, वह चील और मेरे भाइयों, सभी दिखाई दे रहे हैं" | फिर वहि प्रश्नोत्तर दोहराया गया | तत्पश्चात द्रोणाचार्यजी नाराज होकर युधिष्ठिर को दूर हटने की आदेश देकर कहे – "तुमसे यह निशाना नहीं लगाया जाएगा" | फिर दुर्योधन की बारी आयी और उनके बाद उनके भाइयों की | सारे भाइयों समान उत्तर दिए कि उन्हें सभी दिखाई दे रहे हैं | भीम और उनके भाइयों के भी यही उत्तर था | फिर अर्जुन की बारी आयी | द्रोणाचार्य के उसी प्रश्न के उत्तर में अर्जुन ने कहा "मुझे सिर्फ वह चील नज़र आ रहा हैं | मुझे वह पेड़ या आप नज़र नहीं आ रहे हैं" | "तुम्हे पक्षी तो दिखाई दे रही न?" द्रोणाचार्यजी के इस प्रश्न के उत्तर में, अर्जुन बोले कि उन्हें सिर्फ और सिर्फ पक्षी का सिर नज़र आ रहा हैं न की चील का बदन | रोमांचित होते हुए द्रोणाचार्यजी ने अर्जुन को बाण चलाने का आदेश दिया | पक्षी का सिर नीचे आ गिरा | द्रोणाचार्यजी पुलकित हुये | किसी भी कार्य को पूर्ण करने के लिए एकाग्रता की ज़रूरत हैं | मन सिर्फ लक्ष्य पर ही लगना चाहिए | इधर उधर भटक्ते हुऎ मन को एकाग्रता कैसे मिलेगा? {यह बात आज की पीड़ी के विद्यार्थियों पर भी लागू होता है | इंटरनेट में आने वाले फालतू चीज़ों को देखते रहे तो एकाग्र कैसे रह पाएंगे ?} अध्यात्म जीवन में भी एकाग्रता और जाग्रता आवश्यक हैं | सावधानी से ब्रह्म लक्ष्य को पाना हैं – यही तो उपनिषद् की उपदॆश हैं | आखिर में एक बात – "अपने आप बैठे हुए पक्षी को मार दिया गया!" ऐसे संताप महसूस नहीं करें | वो पक्षी शिल्पी के द्वारा निर्मित कृत्रिम पक्षि था |

सूचन : इस लेख का कन्नड़ संस्करण AYVM ब्लॉग पर देखा जा सकता है |


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